सूरत और सीरत
दोस्तो ! आज कुछ बातें करते
हैं सूरत और सीरत की और साथ ही सुनते हैं कुछ मधुर गीत :
माना 'अच्छी सूरत' भी ज़रूरी है, पर बिन 'सीरत' यह 'सूरत' किस काम की ? सूरत का
क्या, आज जवां है
कल मुरझा जाएगी । परसों मिट्टी में मिल जाएगी । याद तो हर जगह बस तेरी सीरत ही
आएगी ।
सूरत व्यक्तित्व का वो पहलू
है जो प्रत्यक्ष दिखाई देता है, सीरत व्यक्तित्व का वो हिस्सा है जो सामने तो नहीं पर व्यवहार से झलकता
है । इसलिए अगर किसी का समग्र मूल्यांकन करना हो तो सूरत और सीरत का समुचित
मूल्यांकन करना होगा । इसलिए दिखावे
बनावटी तौर पर आप कुछ भी दिखाये, पर आपका व्यवहार सीरत का
असली हाल उजागर कर देता है । ये गीत भी तो कुछ ऐसा ही संदेश दे रहा है ।
जब आप किसी अजनबी अंजान व्यक्ति से मिलते हैं, उसका चेहरा आप पहले देखकर
मूल्यांकन करने की कोशिश करते हैं , उसकी
भाव-भंगिमाएँ आपको सहज या असहज बनाती हैं ।फिर उससे बात करने के बाद आप उसका पूरा चरित्र तो नहीं समझ
पाते पर, उसका व्यवहार आपके अनुरूप था या नहीं के हिसाब से
आप उस व्यक्ति की एक छवि अपने मन में बना लेते हैं । ऐसा हमारे साथ कई बार हुआ है, तो फिर आप क्या याद रखते हैं उस व्यक्ति की शक्ल या उस व्यक्ति का
व्यवहार यानि उसकी सीरत?
सीरत ऐसा हुनर है जो आपके लिए दूसरे के दिल में
जगह बना लेता है और जब आप दिल में बस जाते हैं तो आप उनको अपनों से लगने लगते हैं । किसी शायर ने क्या खूब कहा है –
“सिर्फ
सीरत ने जीता है हर एक दिल को
बस
थोड़ा सा वक्त का तक़ाज़ा चाहिए” ।
सुनिए ये गीत,
दोस्तो, जीवन में सफलता और लोकप्रियता के लिए आपके अच्छे स्वभाव का
होना ज़रूरी है । उदाहरण के तौर पर लीजिये- आपके पास ज्ञान का अकूत भंडार है, आत्मविश्वास है, संकल्प शक्ति से सराबोर हैं, मगर यदि आप के पास अच्छा स्वभाव नहीं है तो आपको कदम कदम पर मुसीबत खड़ी
मिलेगी । आपके सफल जीवन में आपके गुरुजन ,शुभचिंतक,मित्रा,साथी,भाई-बहन,किसी न किसी रूप में शरीक होते हैं । भला अकेला चना भाड़ फोड़ सकता है क्या ? तो सभी को साथ रख कर आप अपनी सीरत का कुशलतापूर्वक विकास और निर्माण करें
।
एक हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्ति लोकप्रिय होता है अपनी सीरत से, विनम्रता का जामा पहने वो सफलता के सोपान चड़ सकता है । शारीरिक सौंदर्य
तो ईश्वर की नेमत है लेकिन सीरत आप खुद बनाते हैं । आपसी मेलजोल से आपमें गुणात्मक वृद्धि होती है
।जैसा व्यवहार आप दूसरों से अपने लिए
चाहते हैं वैसा व्यवहार दूसरा भी आप से अपेक्षित रखता है । ये गीत भी तो ऐसी ही कुछ बात कह रहा है न -!
अक्सर हम अपने दोस्त, रिश्तेदार या साथी ढूंढते वक्त
ज़हन में शक्लें ही केवल याद रख लें तो क्या होगा ? अगर आप
केवल शक्लें ही याद रखेंगे तो आपके निर्णय ग़लत हो सकते हैं । व्यक्ति कि पहचान भले
ही चेहरा हो सकता है, पर उस चेहरे कि असली पहचान तो उस
व्यक्ति कि सीरत ही होती है । बहुत ज़रूरी हो जाता है जब हम अपने जीवन-साथी का चयन
करें तो बहुत सोच-विचार करके ही निर्णय लें । ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत संभव है कि
सामने वाले कि रुचि, व्यवहार, आदतें, आपके अनुरूप न हों और आप केवल शक्ल या ‘सूरत’ देखकर ही हामी भर दें । किसी का व्यक्तित्व का हिस्सा सूरत तो हो सकती है
पर उसके समग्र व्यक्तित्व की पहचान, उसकी सीरत ही होगी ।
चेहरे की खूबसूरती कुछ पलों
के लिए आकर्षित करती है, लेकिन सीरत की खूबसूरती ज़िंदगी भर के लिए अपना बना लेती है । आपके पास
खूबसूरत चेहरा हो या न हो लेकिन, सीरत की खूबसूरती ज़रूर होनी
चाहिए । सूरत ही अक्सर लोग देखते हैं ।
सीरत की सुध तब होती है, जब अक्सर देर हो जाती है । सूरत से
सब सुलझे- भले लगे पर सीरत किसकी कितनी उलझी क्या पता ? इसी
बात पर सुनिए फिल्म डैडी का ये गीत :-
मनुष्य को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना कहा जा
सकता है । पर इस रचना में अच्छाइयाँ और कई बुराइयां दोनों छिपी हैं । हें तो मानव
चाहे तो अपनी अच्छाइयाँ बढ़ाए या अपनी बुराइयाँ बढ़ाए, भगवान की इस रचना में कोई बहुत सुंदर है तो, कोई इतना भाग्यशाली की घर-धन-धान्य से भरा रहता है तो कोई किस्मत का ऐसा
मारा है जो दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पाता । पर इन सबसे परे हमें एक बात यह
नहीं भूलना चाहिए कि सूरत नहीं सीरत अच्छी होनी चाहिए । किसी कि चिकनी-चुपड़ी बातों
में न आकर न खुद पे पैर पर कुल्हाड़ी न मार लेना । सिर्फ दिल कि बात पर न जाना कुछ
दिल और व्यवहार, चलो इक काम करते हैं । आज हम खुद से इश्क
करते हैं देखते दिल के आईने में अपनी सूरत नहीं सीरत से सँवरते हैं ।
विपरीत पारिस्थितियों में व्यक्ति कि असली
पहचान नज़र आ ही जाती है । ऐसी स्थिति में अक्सर लोग दूसरों का संबल और सहारा चाहते
हैं तब आप किसी कि सीरत का सही अनुमान लगा सकते हैं । अच्छों से भी हम हमेशा कहते
हैं हमेशा अपने दोस्त सोच समझ कर ही चुनो, बालिग होते बच्चों से, किशोरावस्था में
चल रहे बच्चों के रुझान और दोस्ती-यारी से घर के बड़े अक्सर तनाव में होते हैं, कि कहीं उनके बच्चों का चयन ग़लत तो नहीं होगा क्योंकि इससे उनकी दिशा और
संगत तय होती है । यही नहीं, जीवन में आप के साथ उठने बैठने
वालों, आपके रिशतेदारों और मित्रों का आप के स्वभाव पर
प्रभाव दिखाई देता है । इसीलिए तो कहा है :
सकारात्मक दृष्टिकोण में वो जज़्बा होता है जैसा
दीपक में जो एक लौ से असंख्य दीपक रोशन कर दे ,कहने का अर्थ ये है कि आपके अच्छे विचार और स्वभाव से आप अकेले
की शक्ति समूहिक शक्ति में बदल सकती है, एक ऐसी शक्ति जो मार्ग प्रशस्त करे आपके लक्ष्य को बुलंदियों तक पहुंचा
दे ।
किसी भी व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक , शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और
परिस्थिति का उस व्यक्ति के सीरत और चरित्र पर प्रभाव पड़ता है । इन सब का संतुलन
सही हो तो सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा । सीरत एक व्यापक सोच है हर परेशानी, हर विपरीत परिस्थिति में इसकी परीक्षा ज़रूर होती है, ऐसे में आपका व्यवहार, स्वभाव, आपकी एकाग्रता,सहनशीलता आप के सीरत का परिचय देती
है ।
रुखसती जब भी इस जहां से हो,
मेरी सूरत पे, मेरी सीरतें सिकंदर हों ।
दोस्तो ! जल्दी ही फिर मिलेंगे – किसी नए विषय और मधुर गीतों के साथ .... अपनी
प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये ।
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तहत कार्रवाई की जाएगी । गीतों की लिंक youtube से साभार ।
© neetika verma नीतिका
वर्मा
Very nicely written...
ReplyDeleteThanks
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