Friday, March 27, 2020

सूरत और सीरत


सूरत और सीरत

            दोस्तो ! आज कुछ बातें करते हैं सूरत और सीरत की और साथ ही सुनते हैं कुछ मधुर गीत :
            माना 'अच्छी सूरत' भी ज़रूरी है, पर बिन 'सीरत' यह 'सूरत' किस काम की ? सूरत का क्या, आज जवां है कल मुरझा जाएगी । परसों मिट्टी में मिल जाएगी । याद तो हर जगह बस तेरी सीरत ही आएगी  ।
            सूरत व्यक्तित्व का वो पहलू है जो प्रत्यक्ष दिखाई देता है, सीरत व्यक्तित्व का वो हिस्सा है जो सामने तो नहीं पर व्यवहार से झलकता है । इसलिए अगर किसी का समग्र मूल्यांकन करना हो तो सूरत और सीरत का समुचित मूल्यांकन करना होगा  । इसलिए दिखावे बनावटी तौर पर आप कुछ भी दिखाये, पर आपका व्यवहार  सीरत का  असली हाल उजागर कर देता है । ये गीत भी तो कुछ ऐसा ही संदेश दे रहा है ।
जब आप किसी अजनबी अंजान व्यक्ति से मिलते हैं, उसका चेहरा आप  पहले देखकर  मूल्यांकन करने की कोशिश करते हैं , उसकी भाव-भंगिमाएँ आपको सहज या असहज बनाती हैं ।फिर उससे बात  करने के बाद आप उसका पूरा चरित्र तो नहीं समझ पाते पर, उसका व्यवहार आपके अनुरूप था या नहीं के हिसाब से आप उस व्यक्ति की एक छवि अपने मन में बना लेते हैं । ऐसा हमारे साथ कई बार हुआ है, तो फिर आप क्या याद रखते हैं उस व्यक्ति की शक्ल या उस व्यक्ति का व्यवहार यानि उसकी सीरत?
सीरत ऐसा हुनर है जो आपके लिए दूसरे के दिल में जगह बना लेता है और जब आप दिल में बस जाते हैं तो आप उनको अपनों से लगने लगते हैं  । किसी शायर ने क्या खूब कहा है –
                       “सिर्फ सीरत ने जीता है हर एक दिल को
                        बस थोड़ा सा वक्त का तक़ाज़ा चाहिए” । 
सुनिए ये गीत,
दोस्तो, जीवन में सफलता और लोकप्रियता के लिए आपके अच्छे स्वभाव का होना ज़रूरी है । उदाहरण के तौर पर लीजिये- आपके पास ज्ञान का अकूत भंडार है, आत्मविश्वास है, संकल्प शक्ति से सराबोर हैं, मगर यदि आप के पास अच्छा स्वभाव नहीं है तो आपको कदम कदम पर मुसीबत खड़ी मिलेगी  । आपके सफल जीवन में आपके गुरुजन ,शुभचिंतक,मित्रा,साथी,भाई-बहन,किसी न किसी रूप में शरीक होते हैं  । भला अकेला चना भाड़ फोड़ सकता है क्या ? तो सभी को साथ रख कर आप अपनी सीरत का कुशलतापूर्वक विकास और निर्माण करें । 
एक हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्ति लोकप्रिय होता है अपनी सीरत से, विनम्रता का जामा पहने वो सफलता के सोपान चड़ सकता है । शारीरिक सौंदर्य तो ईश्वर की नेमत है लेकिन सीरत आप खुद बनाते हैं  । आपसी मेलजोल से आपमें गुणात्मक वृद्धि होती है  ।जैसा व्यवहार आप दूसरों से अपने लिए चाहते हैं वैसा व्यवहार दूसरा भी आप से अपेक्षित रखता है  । ये गीत भी तो ऐसी ही कुछ बात कह रहा है न -!
अक्सर हम अपने दोस्त, रिश्तेदार या साथी ढूंढते वक्त ज़हन में शक्लें ही केवल याद रख लें तो क्या होगा ? अगर आप केवल शक्लें ही याद रखेंगे तो आपके निर्णय ग़लत हो सकते हैं । व्यक्ति कि पहचान भले ही चेहरा हो सकता है, पर उस चेहरे कि असली पहचान तो उस व्यक्ति कि सीरत ही होती है । बहुत ज़रूरी हो जाता है जब हम अपने जीवन-साथी का चयन करें तो बहुत सोच-विचार करके ही निर्णय लें । ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत संभव है कि सामने वाले कि रुचि, व्यवहार, आदतें, आपके अनुरूप न हों और आप केवल शक्ल या ‘सूरत’ देखकर ही हामी भर दें । किसी का व्यक्तित्व का हिस्सा सूरत तो हो सकती है पर उसके समग्र व्यक्तित्व की पहचान, उसकी सीरत ही होगी  ।
            चेहरे की खूबसूरती कुछ पलों के लिए आकर्षित करती है, लेकिन सीरत की खूबसूरती ज़िंदगी भर के लिए अपना बना लेती है । आपके पास खूबसूरत चेहरा हो या न हो लेकिन, सीरत की खूबसूरती ज़रूर होनी चाहिए ।  सूरत ही अक्सर लोग देखते हैं । सीरत की सुध तब होती है, जब अक्सर देर हो जाती है । सूरत से सब सुलझे- भले लगे पर सीरत किसकी कितनी उलझी क्या पता ? इसी बात पर सुनिए फिल्म डैडी का ये गीत :-
मनुष्य को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना कहा जा सकता है । पर इस रचना में अच्छाइयाँ और कई बुराइयां दोनों छिपी हैं । हें तो मानव चाहे तो अपनी अच्छाइयाँ बढ़ाए या अपनी बुराइयाँ बढ़ाए, भगवान की इस रचना में कोई बहुत सुंदर है तो, कोई इतना भाग्यशाली की घर-धन-धान्य से भरा रहता है तो कोई किस्मत का ऐसा मारा है जो दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पाता । पर इन सबसे परे हमें एक बात यह नहीं भूलना चाहिए कि सूरत नहीं सीरत अच्छी होनी चाहिए । किसी कि चिकनी-चुपड़ी बातों में न आकर न खुद पे पैर पर कुल्हाड़ी न मार लेना । सिर्फ दिल कि बात पर न जाना कुछ दिल और व्यवहार, चलो इक काम करते हैं । आज हम खुद से इश्क करते हैं देखते दिल के आईने में अपनी सूरत नहीं सीरत से सँवरते हैं ।
विपरीत पारिस्थितियों में व्यक्ति कि असली पहचान नज़र आ ही जाती है । ऐसी स्थिति में अक्सर लोग दूसरों का संबल और सहारा चाहते हैं तब आप किसी कि सीरत का सही अनुमान लगा सकते हैं । अच्छों से भी हम हमेशा कहते हैं हमेशा अपने दोस्त सोच समझ कर ही चुनो, बालिग होते बच्चों से, किशोरावस्था में चल रहे बच्चों के रुझान और दोस्ती-यारी से घर के बड़े अक्सर तनाव में होते हैं, कि कहीं उनके बच्चों का चयन ग़लत तो नहीं होगा क्योंकि इससे उनकी दिशा और संगत तय होती है । यही नहीं, जीवन में आप के साथ उठने बैठने वालों, आपके रिशतेदारों और मित्रों का आप के स्वभाव पर प्रभाव दिखाई देता है । इसीलिए तो कहा है :
सकारात्मक दृष्टिकोण में वो जज़्बा होता है जैसा दीपक में जो एक लौ से असंख्य दीपक रोशन कर दे ,कहने का अर्थ ये है कि आपके अच्छे विचार और स्वभाव से आप अकेले की  शक्ति समूहिक शक्ति में बदल सकती है, एक ऐसी शक्ति जो मार्ग प्रशस्त करे आपके लक्ष्य को बुलंदियों तक पहुंचा दे  ।
किसी भी व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक , शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और परिस्थिति का उस व्यक्ति के सीरत और चरित्र पर प्रभाव पड़ता है । इन सब का संतुलन सही हो तो सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा । सीरत एक व्यापक सोच है हर परेशानी, हर विपरीत परिस्थिति में इसकी परीक्षा ज़रूर होती है, ऐसे में आपका व्यवहार, स्वभाव, आपकी एकाग्रता,सहनशीलता आप के सीरत का परिचय देती है  ।
                                    रुखसती  जब भी इस जहां से हो,
            मेरी सूरत पे, मेरी सीरतें सिकंदर हों ।
दोस्तो ! जल्दी ही फिर मिलेंगे – किसी नए विषय और मधुर गीतों के साथ .... अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये ।

*************************************************************************
डिसक्लेमर :
ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है  । इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है  । अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी । गीतों की लिंक youtube से साभार ।
© neetika verma नीतिका वर्मा

COVID-19 और लॉक डाउन


लॉक डाउन और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी




जीना मुश्किल है कि आसान जरा देख तो लो ।
लोग लगते हैं परेशान जरा देख तो लो ।
यह नया शहर तो खूब बसाया तुमने
क्यों पुराना हुआ वीरान जरा देख तो लो ॥

सुप्रसिद्ध कवि कुंवर बेचैन की यह पंक्तियां आज कितनी सटीक हैं । दिन पर दिन बढ़ते कोरोना वाइरस संक्रमण के मरीज, हमें सैनिटाइज करते रहने की हिदायत और आइसोलेशन में रहने की जो जिंदगी हमें मिली है वह शायद हम सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दे कि हमारा प्रकृति से जुड़कर जीना ही उचित है और इस बात पर हम सर्वसहमत हो सकें । बहरहाल, अब जब घर पर ही रहने की बात कही जा रही है, सोशल गेदरिंग से बचने की बात कही जा रही है, सोशल डिस्टेंसिंग ही हमें सुरक्षित रख पाएगी की बात सिद्ध हो चुकी है तो मानव के सामाजिक प्राणी होने की बात पर शंका होने लगी है । चलिये दोस्तो, ये गीत सुनते हैं :
आज हम घर पर बैठे मनोरंजन के लिए टीवी और मोबाइल को ही अपना साथी बना बैठे हैं । बच्चों ने तय कर लिया है कि वह कार्टून देखेंगे, वीडियो गेम खेलेंगे और टीवी देखते ही समय गुजारेंगे । इसमें कोई बुराई तो नहीं दिखती पर बीच-बीच में यदि आप ब्रेक लेंगे तो आंखों के लिए ठीक होगा । टीवी पर अच्छी फिल्म देखी जा सकती है । टेक्नोलॉजी का यदि उपयोग करना ही है तो मोबाइल या फोन पर अपनों से बातें करें । जिन से आपने काफी समय से बात न की हो उन्हें याद कीजिए । तो उठाइए फोन और डायरेक्टरी । याद कीजिए उन्हें, जिन्हें आप भूल बैठे हैं । आपका यह प्रयास सामने वाले को बेहद खुश कर सकेगा और आपको सुकून मिलेगा, तसल्ली मिलेगी और आपका हृदय गदगद हो जाएगा । फिल्म प्रेम पुजारी में नीरज जी का लिखा ये गीत मन को प्रसन्न कर देगा :   
आपको इन दिनों कई मैसेज और वीडियो मिल रहे होंगे आनन-फानन में इन्हें फॉरवर्ड मत कीजिये असामाजिक और फेक संदेशों से सतर्क रहें । ये बात आप भी मानते होंगे कि संप्रेषण के अभाव में अपनत्व खोता जा रहा है जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि संतोष है इस समय के परिपेक्ष्य में अपने आसपास ही मनोरंजन का साधन आपको ढूँढना चाहिए जन जन की भागीदारी और सहयोग से कोरोना वाइरस संक्रमण से जंग हम जीत सकेंगे ।
कोरोना वाइरस संक्रमण के बढ़ते मरीज और आज के समय पर अनिवार्य रूप से सैनिटाइजेशन करते रहने की बात और आइसोलेट सी जिंदगी हमें कुछ तनाव में ला रही है स्कूल-कॉलेज बंद हो चुके हैं मॉल भीड़भाड़ वाली जगह सुरक्षित नहीं रह गई है ऐसे में घर से केवल जरूरत पड़ने पर ही निकलने की सलाह दी जा रही है। असमय स्कूल बंद हो जाने के कारण बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है एग्जाम के चक्कर से बचने की खुशी तो बाहर घूमने फिरने खेलने की पाबंदी ऐसे में वे क्या करें? बच्चे तो क्या बड़ों के लिए भी यह समस्या है दिनभर टीवी या मोबाइल पर डटे रहे तो स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा ऐसे में आप कुछ घरेलू खेल खेलकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं इसके अलावा जैसे कैरम, लूडो, चौपड़, शतरंज कुछ ऐसे खेल है जिसे खेलने के लिए 2 से 4 लोग भी हो तो आप का खेल रुकेगा नहीं । सुनिए, फिल्म मिस्टर इंडिया में बच्चे किस तरह से अपना मनोरंजन कर रहे हैं :
आज के परिपेक्ष्य में जरूरी है कि कुछ फेरबदल कर अपने शौक और रूचि के अनुसार बदलाव लाएं । आप मेरी बात से सहमत होंगे आज से दो दशक पहले का और उससे भी पहले का रुख कीजिए उस दौर में बच्चे स्कूल से आते थे भोजन करते थे और फिर टोलियों में पार्क में, मैदान में, या फिर गली में ही खेलते थे । संझा होते हैं घर को लौटते थे पढ़ते थे और घर पर बने भोजन को बड़े चाव से खाया करते थे, उस दौर में माता-पिता अपने बच्चों के शारीरिक विकास को लेकर चिंतित नहीं हुआ करते थे । पर टेक्नोलॉजी के बदलते हैं जीवन में बड़ा बदलाव आया बच्चे खेल के मैदान में कम और टेक्नोलॉजी पर बेस खेल पर  ज्यादा ध्यान देते  हैं,  ऐसे में मोटापा और शारीरिक क्षमता पर असर पड़ा है। आज यदि घर पर रहना जरूरी हो गया है जब हम बाहर खेलकूद नहीं कर सकते हैं तो फिर ऐसे में नियमित रूप से दोनों वक्त यानि सुबह-शाम आपको योगा करना चाहिए और भोजन आप सादा सात्विक करें और सुनें फिल्म सूरमा का ये गीत :
गुजरा जमाना ऐसा नहीं बीता जिसे आप दोहरा न सके इसके अलावा घर के बड़ों से जरूरी सलाह ने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी से किस्से कहानियां जरूर सुने । ऐसा आज से दो दशक और उससे भी पहले हुआ करता था घर के बड़े किस्से कहानियां हमें सुनाते थे जिससे कि आज की जनरेशन दूर है समय का टोटा सभी के लिए एक जुमला सा है भागमभाग की जिंदगी में ऐसे में बहुत कुछ करने की इच्छा करने वालों के लिए अभी जो समय मिला है उसमें वह भी अपनी अभिरुचि पूरी कर सकते हैं।  आप बिना किसी संकोच के अपने अभिरुचि को समय दीजिए वह सुरक्षित हो कोरोना वाइरस संक्रमण से और वह घर पर ही रह कर कर सके।  लेखन और पढ़ाई का अच्छा समय है किचन गार्डन या बगीचे में समय लगा सकते हैं , बच्चे भी अपने बड़ों की अनुमति से फायर लेस कुकिंग कर समय बिता सकते हैं।  रोज की दिनचर्या के अलावा यदि घर के कामों को सभी मिल बाँट कर करें तो आप सभी का समय अच्छा व्यतीत होगा । सुनिए फिल्म मिस्टर नटवारलाल में अमिताभ बच्चन जी के द्वारा सुनाई गई ये कहानी :
बच्चे बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट यानी कबाड़ से जुगाड़ कर उपयोगी वस्तु बना सकते हैं यहाँ फिर वही बात कहेंगे का पूरा पूरा ध्यान रखें कोरोना वाइरस संक्रमण से बचने की सारी सावधानियां रखें । आप रुचि रखते  हो तो  सिलाई,कढ़ाई, बुनाई भी सीखी जा सकती है । यदि पेंटिंग करने के शौकीन है तो हाथ इन दिनों आजमा ही लीजिएगा । आप दिमागी कसरत भी कर सकते हैं आप मेडिटेशन करके अपने मन को शांत रखें, वर्ग पहेली भरिए इसके अलावा यदि संयुक्त परिवार में आप रहते हैं तो अंताक्षरी या फिर प्रश्नोत्तरी का खेल कैसा रहेगा ऐसे में तंबोला खेल कर भी आप अपना अच्छा समय व्यतीत कर सकते हैं जैसे मैंने प्यार किया फिल्म में इन लोगों ने किया :
रेडियो को आप यदि मनोरंजन के लिए चुनते हैं तो आप सूचना शिक्षा और मनोरंजन तीनों के करीब होंगे । टीवी पर समाचार और मनोरंजन के लिए आप को चैनल बदलना पड़ता है । तो हुई न सोने पर सुहागे वाली बात बिना रुकावट के आप सुनते रहिए और काम करते जाइए ।
होकर मायूस न यूं शाम से ढलते रहिए । 
जिंदगी भोर है सूरज से चढ़ते रहिए । 
एक ही ठाँव पर ठहरेंगे तो थक जाएंगे-
धीरे ही सही राह पर चलते रहिए ।

तो दोस्तो ! लॉक डाउन का सदुपयोग कीजिये, घर में अपनों के साथ रहिए और वो सब तलाश कीजिए जो जीवन की आपाधापी में पीछे कहीं छूट गया है । अपना ख्याल रखिए, अपनों का ख्याल रखिए । जल्दी ही फिर मिलेंगे ।

*********************************************************************************
डिसक्लेमर : 
* ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है । इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है । अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी । 
* सभी गीतों की लिंक youtube से साभार ली गई है । 
© neetika verma नीतिका वर्मा
*********************************************************************************